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राणे के बहाने सेना पर लगाम कसना चाहती है बीजेपी

             

मोदी कैबिनेट के विस्तार में महाराष्ट्र के पूर्व सीएम नारायण राणे को मंत्री पद दिए जाने की चर्चा जोरों पर है। राणे अमित शाह के करीबी माने जाते हैं। राणे के निमंत्रण पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कोंकण का दौरा किया था। राज्य में महाविकास अघाड़ी सरकार बनने के बाद ऐसा पहली बार हुआ था, जब किसी नेता के बुलावे पर खुद अमित शाह आएं हों। शाह के दौरे के बाद से ही बीजेपी और केंद्र में राणे की अच्छी धाक जम गई। 

       
       लेखक : डा. एस. शर्मा ‘विप्लब’

पीएम मोदी और  महाराष्ट्र के सीएम उध्दव ठाकरे की मुलाकात के बाद से राज्य में राजनीतिक माहौल गरमाने लगा है। शरद पवार के पेट में दर्द हुआ।कांग्रेस भी कहां पीछे रहने वाली थी। नाना पटोले ने खुद को सीएम फेस घोषित कर दिया। समीकरण बदलने लगे। दरअसल महाराष्ट्र में शिवसेना और उध्दव ठाकरे के बढ़ते राजनीतिक कद को कम करने के लिए बीजेपी ने राणे पर दांव चला है। इससे जहां कोंकण में राणे के साथ बीजेपी भी मजबूत होगी, वहीं शिवसेना के खिलाफ बीजेपी की आवाज और भी बुलंद होगी। 

दूसरा  मराठा आरक्षण मुद्दे पर बीजेपी को सबसे बड़ा फायदा मिलेगा। ये मुद्दा उध्दव ठाकरे सरकार के लिए सिरदर्द बना हुआ है। ऐसे में बीजेपी, राणे के बहाने मराठा युवाओं को आकर्षित करना चाहेगी।  खास बात यह है कि मराठा आरक्षण के लिए राणे की अध्यक्षता वाली समिति ने ही सिफारिश की थी। इसका पूरा फायदा बीजेपी को मिलेगा। देश भर में सबसे अमीर महानगरपालिका के रूप में जानी जाने वाली बीएमसी चुनाव पर भी बीजेपी की पैनी नजर है। यहां पिछले 26 सालों से शिवसेना की सत्ता है। अगले साल चुनाव है। यहां भी बीजेपी के लिए राणे फायदेमंद साबित होंगे। बीजेपी राणे को और मजबूत कर शिवसेना को पटखनी देने के मूड में है।

  मोदी कैबिनेट में अगर नारायण राणे को मंत्री बनाया गया तो यह शिवसेना के जख्मों पर नमक डालने जैसा होगा। ये भी साफ है कि इसके बाद बीजेपी-शिवसेना का गठबंधन मुश्किल हो जाएगा। 


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