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माता-पिता ने तीन लाख में बेचा अपना बेटा और फिर रची अपहरण की कहानी

 कानपुर . फतेहपुर बेरी इलाके में एक दंपति ने अपने छह दिन के नवजात को साढ़े तीन लाख रुपये में बेच दिया। वहीं, जब चेक कैश नहीं हुआ तो पुलिस को अपहरण की झूठी सूचना दे दी। पुलिस ने केस दर्ज कर छह घंटे में बच्चे को सकुशल बरामद कर लिया। पुलिस ने बच्चे को बेचने और खरीदने वाले दंपतियों के साथ ही इस सौदे को कराने वाले दो लोगों को भी गिरफ्तार कर लिया है। साथ ही चालीस हजार के चार चेक, 15 हजार की नकदी, 80 हजार रुपये निकालने की दो रसीद और तीन मोबाइल बरामद किए हैं। पुलिस उपायुक्त अतुल कुमार ठाकुर ने बताया कि मंगलवार को पुलिस को नवजात के अपहरण की सूचना मिली। 

शिकायतकर्ता गोविंद कुमार ने बताया उसकी पत्नी पूजा ने आठ जून को एक बेटे को जन्म दिया था। घर में जगह की कमी देख उसके दोस्त हरिपाल सिंह ने उन्हें अपने घर पर रहने के लिए बुला लिया था। गोविंद ने बताया कि 14 जून को जब हम लोग सो गए तो हरिपाल बच्चे को लेकर फरार हो गया। पुलिस ने शिकायत के आधार पर अपहरण का केस दर्ज कर जांच शुरू की। फतेहपुर बेरी थाना एसएचओ कुलदीप सिंह की टीम ने हरिपाल को आया नगर से गिरफ्तार कर लिया। हरिपाल ने बताया कि दंपति ने खुद बच्चे को रमन यादव के रिश्तेदार को बेचा है। रमन यादव मोती बाग में रहता है। पुलिस ने रमन को उसके घर से दबोच लिया। रमन ने बताया कि उसके जिस रिश्तेदार ने बच्चा खरीदा है, वह दिल्ली से जाने के लिए ट्रेन में सवार हो चुका है। पुलिस को पता चला ट्रेन ढाई बजे रात में कानपुर सेंट्रल पहुंचेगी। पुलिस ने रेलवे स्टेशन पुलिस से संपर्क साधा। कानपुर पुलिस ने दंपति को पकड़ लिया और दिल्ली पुलिस को सूचना दी। पुलिस की एक टीम कानपुर पहुंची और आरोपी दंपति के साथ नवजात को ले आई। आरोपियों विद्यानंद और उनकी पत्नी रामपरी देवी ने पुलिस को बताया कि उनकी शादी के 25 साल बाद भी कोई बच्चा नहीं हुआ था। इसलिए उन्होंने अपना वंश चलाने के लिए रमन को बताया कि वे बच्चा गोद लेना चाहते हैं।

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